ये दुनिया मेरे काम की नहीं
ये दुनिया मेरे काम की नहीं
ये दुनिया मेरे काम की नहीं,
ऐसा मयखाना जहाँ एक जाम भी नहीं !
इस गुलशन में नहीं मेरा कोई नशेमन ,कागज के फूलों का कंटीला उपवन,
बनावट के मकड़ जाल में फंस, निकलती मेरी जान भी नहीं ।
प्रचार और इश्तहार के पाँव पर टंगी शोहरत,
बेशुमार काला सफ़ेद दौलत.
ये सब मिल भी जाए तो क्या हो !
कितनी झूठी और खोखली है इनकी फितरत ।
समंदर में उड़ता पंछी जब कोई जहाज भी नहीं,
सुलझाने और समझने के लिए कोई राज़ भी नहीं,
अब दिल लगता नहीं इस रेत के समंदर में,
भीड़ में तन्हा , कोई अपना पास भी नहीं ।
क्या कोई संकेत है ये वीरान आवारगी ?
ये यायावर की बेचैन ज़िन्दगी,
दूर से आती है किसी पुकार की आहट,
शायद किसी नए आकाश का स्वागत ।
ऐसा मयखाना जहाँ एक जाम भी नहीं !
इस गुलशन में नहीं मेरा कोई नशेमन ,कागज के फूलों का कंटीला उपवन,
बनावट के मकड़ जाल में फंस, निकलती मेरी जान भी नहीं ।
प्रचार और इश्तहार के पाँव पर टंगी शोहरत,
बेशुमार काला सफ़ेद दौलत.
ये सब मिल भी जाए तो क्या हो !
कितनी झूठी और खोखली है इनकी फितरत ।
समंदर में उड़ता पंछी जब कोई जहाज भी नहीं,
सुलझाने और समझने के लिए कोई राज़ भी नहीं,
अब दिल लगता नहीं इस रेत के समंदर में,
भीड़ में तन्हा , कोई अपना पास भी नहीं ।
क्या कोई संकेत है ये वीरान आवारगी ?
ये यायावर की बेचैन ज़िन्दगी,
दूर से आती है किसी पुकार की आहट,
शायद किसी नए आकाश का स्वागत ।
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