शोर में संनाटा

शोर में संनाटा
शोर में है कितना संनाटा,
और संनाटे में है चीखता शोर|
अंधेरे में साया भी जाता छोड,
अपनी भी ख,बर लेकर अब कोर्इ नहीं आता|
अब तो आओ मेरे बिल्कुल क,रीब,
बन्द करदो आंखें और ज,ुबा मेरी , कर दो तरकीब!
भर दो अपनी धड,कन और सांसों से,
बेइंतहा चुभतीं खामोशी अज्,ाीब|
आज शोर में है दम घोटता संनाटा,
भीड, में इन्सां तन्हा छटपटाता|
और खामोश तन्हार्इ भी एक कैद ह,ै
जहां शोर्र ओर् गुल और मन , हुज,ूम से घिरा होता|

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