मोहब्बत नहीं करत हम, करत े हे ैं बस उसकी बातें,
होती है मोहब्बत म बस, आँखों की खामोश म ैं ुलाकातें।
जब दर रहती हो त ू ुम मुझ से,
सहारा देती हैं तु म्हारी सबनमि यादें।
तन्हाई के बेजान अन्धियारें में,
जुगनूकी तरह चमकती है हमारी वो रातें।
तुम दर होकर भी पास हो म ू ेरे, तशवूर की बाँहों में,
अब जब तुम मेरी बाँहों में हो, कयों बोझल हो गई हैं ये सांसे!
कशम कशे जिंदगी की कड़ी धूप में,
कितने बेरंग हो जात हे ैं, हमारे कश्मे वादे!
मेरे कटीले और ग़मज़दा वज़ूद को,
स्वीकार कर लिया तूने हँसत मे ुस्कुरात!े
खुदाई से गायब हो गया है खुदा,
इसलिए हम करत हे ैं अक्सर उसकी बातें!
जितना कम होता जाता है, दिल में खुदा का जज़्बा,
उतने ही जोर सोर से करत हे ैं हम, इबादत और फरियादें।
कुदरत से की है हमने, इतनी मनमानी,
कि रूठ गएँ बादल और सूख गईं बरसातें!
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