तेरे लब

तेरे लब
तेरे लब जब मेरे हैं तो पैमाने की क्या दरकार,
एक घूंट से आग बुझा दीजिए सरकार.
जब डूबता और उगता है सूरज, आसमां में रंग बिखेर,
कागज, पर चित्र बनाने की हमें क्या दरकार.
कन्फ्यूज्ड हूँ के पियु तो कहाँ से पियु,
ये आपका जिस्म है या पैमाना है सरकार.
घर के छोट उद्यान में कलियां बातें करती है हंसकर,
अब मुझे किसी रंगीन महफिल की क्या दरकार..
कहते हैं जगत में प्रेम म ही प्रेम म भरा है,
नहीं,अब स्वर्ग जाने की ख्वाहिश और दरकार.
पर नीला आसमां , नीचे बर्फ का समन्दर.
दोनों में डूब जाने को, मेरा दिल है बेकरार.
'स्वीट्जरलैंड' या शिमला बर्फानी सौन्दर्य से भरपूर,
पर मुझे तो सब मिलता है आपकी उज्जवल सादगी से सरकार.
तूफानी दरिया में, प्रेम के मझधार में,
अब डूबकर ही जाना है उस पार.
जब तीर चलाती हो तो इतना ख्याल रखो,
कि तीर हो जाए दिल के आर्-पार.

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