हुस्न
दीवाना और बेगाना बनाता है हुस्न
पर पता नहीं किसी को, क्या होता है हुस्न ?
श्रृंगार या सजावट है या जि,स्म की बनावट
या एक मुस्कराहट,प्यार की नज़र या मीठी छुअन है हुस्न ।
दिल, दिमाग, नशीले नैन या रुख,सार
'सेक्सी फिगर'; आखिर कहाँ छुपा है हुस्न ?
एक ठंडी, नाराज़ सी विश्व सुंदरी से कहीं ज्यादा
किसी काले बच्चे की दंतुल हंसी, या साधारण स्त्री के मीठे स्वभाव में है हुस्न ?
नज़र की कसौटी पर कसा हुआ, हुस्न नहीं रहता बहुत देर तक जवां
दिल, और रूह की बुनियाद पर ही कायम रहता है हुस्न ।
कुदरत के कण -कण में, हर ज़र्रे में, हर तरंग में
आसमां के बादलों में और वर्षा के रुमझुम में, डालियों के 'डांस' में खिलता है हुस्न!
बुद्ध की शांत छवि में, महावीर के नग्न ध्यान में
गाँधी की साधारण सूरत में छलकता है हुस्न ।
तिल -तिल बनी अप्सरा तिलोत्तमा,देवता और ऋषि गण की
शक्तियों का संगम चंडी, दुर्गा; पर है दोनों में कितना हुस्न!
कायनात में हुस्न की बरसात है, तब
हर ज़र्रा हसीं है और हर पल है हुस्न !
पर पता नहीं किसी को, क्या होता है हुस्न ?
श्रृंगार या सजावट है या जि,स्म की बनावट
या एक मुस्कराहट,प्यार की नज़र या मीठी छुअन है हुस्न ।
दिल, दिमाग, नशीले नैन या रुख,सार
'सेक्सी फिगर'; आखिर कहाँ छुपा है हुस्न ?
एक ठंडी, नाराज़ सी विश्व सुंदरी से कहीं ज्यादा
किसी काले बच्चे की दंतुल हंसी, या साधारण स्त्री के मीठे स्वभाव में है हुस्न ?
नज़र की कसौटी पर कसा हुआ, हुस्न नहीं रहता बहुत देर तक जवां
दिल, और रूह की बुनियाद पर ही कायम रहता है हुस्न ।
कुदरत के कण -कण में, हर ज़र्रे में, हर तरंग में
आसमां के बादलों में और वर्षा के रुमझुम में, डालियों के 'डांस' में खिलता है हुस्न!
बुद्ध की शांत छवि में, महावीर के नग्न ध्यान में
गाँधी की साधारण सूरत में छलकता है हुस्न ।
तिल -तिल बनी अप्सरा तिलोत्तमा,देवता और ऋषि गण की
शक्तियों का संगम चंडी, दुर्गा; पर है दोनों में कितना हुस्न!
कायनात में हुस्न की बरसात है, तब
हर ज़र्रा हसीं है और हर पल है हुस्न !

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